मेडिकल पीजी कोर्स में दाखिले के लिए ग्रेस अंक मिलेंगे या नहीं, फैसला सुरक्षित

TNM Editor
By TNM Editor April 18, 2018 13:56 Updated

नई दिल्ली: राज्य में स्नातकोत्तर मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए दूरस्थ / पहाड़ी क्षेत्रों में कार्यरत सरकारी डॉक्टरों के लिए 10 से 30 फीसदी प्रोत्साहन अंक देने के मामले में पांच जजों के संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. MCI ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्यों के पास इस तरह का कोई अधिकार नहीं है कि वो सेवारत डॉक्टरों को इस तरह का कोटा दे. इससे मेरिट का प्रावधान कमजोर होगा और ये सुविधा सिर्फ पीजी डिप्लोमा के लिए हैं. केंद्र ने भी इस कोटा का विरोध किया है और कहा कि राज्य को ये अधिकार नहीं. ये कोटा अवैध है.

सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को यह तय करना है कि क्या राज्य में स्नातकोत्तर मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए दूरस्थ / पहाड़ी क्षेत्रों में कार्यरत सरकारी डॉक्टरों के लिए 10 से 30 फीसदी प्रोत्साहन अंक प्रदान किए जा सकते हैं या नहीं. तीन जजों की पीठ ने तमिलनाडु मेडिकल डॉक्टर एसोसिएशन और अन्य लोगों द्वारा दाखिल याचिकाओं के लिए  बड़ी पीठ के फैसले के लिए भेज दिया था.

याचिकाओं में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन के विनियमन 9 (4) और (8) की वैधता को चुनौती दी है जो इन सेवाओं के लिए डॉक्टरों को आरक्षण प्रदान करते हैं। दूरस्थ और / या मुश्किल क्षेत्रों या ग्रामीण क्षेत्रों में राष्ट्रीय पात्रता-कम प्रवेश परीक्षा में प्रत्येक वर्ष की सेवा के लिए प्राप्त अंकों के 10% से अधिकतम 30% तक प्रोत्साहन ऐसे उम्मीदवारों को प्रदान किया जाता है.

मुख्य विवाद अखिल भारतीय श्रेणी में से राज्यों को दी गई 50% सीटों के संबंध में सेवारत उम्मीदवारों के पक्ष में आरक्षण के लिए राज्य द्वारा किए गए दावे से संबंधित है. इसमें बताया गया है कि कई कारणों से राज्य कई वर्षों से और कई सालों से सेवा प्रदान करने वाले उम्मीदवारों के लिए 50% राज्य कोटा के आरक्षण के पैटर्न का पालन कर रहे हैं. यहां तक कि 50% में  यह सूची मुश्किल, ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में सेवा के लिए प्रोत्साहन प्रदान करके तैयार की जा सकती है. यह भी कहा गया है कि यह  संविधान का उल्लंघन है क्योंकि शहरों में काम कर रहे डॉक्टरों और दूरदराज के क्षेत्रों में काम कर रहे डॉक्टरों के बीच भेदभाव करता है। उन्होंने नियमों को  रद्द करने की मांग की ताकि प्रवेश केवल एनईईटी अंकों के आधार पर किया जा सके.

TNM Editor
By TNM Editor April 18, 2018 13:56 Updated
Write a comment

No Comments

No Comments Yet!

Let me tell You a sad story ! There are no comments yet, but You can be first one to comment this article.

Write a comment
View comments

Write a comment

Your e-mail address will not be published.
Required fields are marked*