DANGAL REVIEW : अखाड़े में छा गए ‘पहलवान’ आमिर

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By TNM Editor December 23, 2016 12:35 Updated

DANGAL REVIEW : अखाड़े में छा गए ‘पहलवान’ आमिर

नई दिल्ली: एक्टर आमिर खान की फिल्म दंगल(DANGAL) आज रिलीज हो गई। क्रिसमस से पहले रिलीज हुई इस फिल्म को तकरीबन सभी क्रिटिक्स ने जमकर सराहा है। यह फिल्म हरियाणा के पहलवान महावीर सिंह फोगट के जीवन पर आधारित है जिन्होंने अपनी बेटियों का अखाड़े में उतारकर उन्हें नामचीन पहलवान बनाया। आमिर की इस फिल्म का लंबे समय से इंतजार हो रहा था लेकिन जब यह फिल्म आई तो ऐसा लगता है बॉक्स ऑफिस पर छा जाएगी।

‘दंगल’हरियाणा के पहलवान महावीर सिंह फोगट के जीवन पर आधारित फिल्म है। एक बेटे के इंतजार में महावीर सिंह फोगट की चार बेटियां पैदा हो जाती हैं। वह निराश होता है क्योंकि उसने अपने बेटे को पहलवान बनाने का सपना संजोया होता है। समय बीतता है और इस बीच एक ऐसी घटना होती है जिससे महावीर अपनी बेटियों को पहलवान बनाने की ठान लेता है। फिल्म आगे बढ़ती है और महावीर अपनी बेटियों को पहलवान बनाने के लिए कड़ी ट्रेनिंग देता है। महावीर सिंह अपनी बेटियों गीता और बबीता को कुश्ती के गुर सिखाकर उन्हें रेसलिंग का चैंपियन बनाता है। उसकी बेटियां मेडल जीतकर तिरंगा लहराती है और उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता। उसने यह सपना बेटे के जरिए देखा था लेकिन जब बेटा नहीं हुआ तो बेटियों ने ही अपने पिता का सपना पूरा कर दिखाया।
दंगल फिल्म की बात सबसे जुदा है। दरअसल यह फिल्म कई मायनों में अलग कही जा सकती है। डायरेक्टर नितेश तिवारी ने फिल्म को कुछ इस तरह से बुना है जिसमें खेल, इमोशन, हास्य के रंगों के साथ रोमांच का भी बोलबाला है। फिल्म की स्क्रिप्ट बेहद कसी हुई है। शायद ही फिल्म में ऐसा कोई सीन हो जो आपको बोर करता हो। एक तरफ जहां फिल्म की कॉमिक टाइमिंग सटीक है तो दूसरी तरफ लाफ्टर डोज भी आपको खूब हंसाता है। साथ ही फिल्म में कई सीन इमोशनल भी है जो आपको रुला देंगे। फिल्म के संवाद दिल को छूते है जिसमें – ‘मेडलिस्ट पेड़ पर नहीं उगते, उन्हें बनाना पड़ता है  प्यार से, मेहनत से, लगन से…’आदि शामिल है। फिल्म में रेसलिंग के कई सीन हैं जो दर्शकों को दिल थाम कर देखने को मजूबर हो जाता है। करीब दो घंटे 50 मिनट की इस फिल्म में आप कही भी बोरियत महसूस नहीं करेंगे।

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