महाशिवरात्रि विशेष : शिव से सीखें, कलयुग में कैसे हो सकते हैं सफल

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By TNM Editor February 23, 2017 13:49

महाशिवरात्रि विशेष : शिव से सीखें, कलयुग में कैसे हो सकते हैं सफल

 

बेशक, भगवान शिव का लाइफ मैनेजमेंट जिंदगी में उतार लिया जाए तो जिंदगी खुशनुमा बन सकती है। क्योंकि शिव, बुराई और अज्ञानता के साथ ही अहंकार को नष्ट करने की सीख देते हैं।

भगवान शिव के केश, एकता के प्रतीक हैं। तो भोलेनाथ की तीसरी आंख, जिंदगी में आने वाली हर समस्या के पहलुओं पर ग़ौर करने की सीख देती है। जिंदगी में ऐसे कई मोढ़ आते हैं, जब हम काफी परेशान हो जाते हैं, तब हमें यह हमारा मनोबल बढ़ाते हैं।

ठीक इसी तरह भोलेनाथ का त्रिशूल मस्तिष्क पर नियंत्रण करने की सीख देता है। शंकर जी का नीला कंठ (नीली गर्दन) क्रोध को पीने की सीख देता है। कहते हैं क्रोध बुद्धि को नष्ट कर देता है। यह एक चुनौती की तरह आता है जिसे आप अपने धैर्य से अपनी वाणी से बाहर न आने दें।

शिव का डमरू कहता है कि अपने शरीर को डमरू की ध्वनि की तरह मुक्त कर दो। इससे सारी इच्छाएं मुक्त हो जाएंगी। भोलेनाथ का कमंडल शरीर की हर उस बुराई को खत्म कर देने का प्रतीक है जो नकारात्मकता से पैदा होती है,और आखिर में भोलेनाथ के गले में सुशोभित सांप कहता है जिंदगी में शारीरिक और मानसिक रूप से स्वतंत्र होना चाहिए यानी आलस्य को त्याग देना चाहिए।

महाशिवरात्रि पर ऐसे करें पूजन, भोलेनाथ सुनेंगे हर भक्त की पुकार

इस वर्ष महाशिवरात्रि 24 फरवरी को है। इस दिन ब्रह्ममुहूर्त में जागें। स्नान, ध्यान आदि से निवृत्त होकर महाशिवरात्रि व्रत का संकल्प करें।

पत्र-पुष्प तथा सुंदर वस्त्रों से मंडप तैयार करके सर्वतोभद्र की वेदी पर कलश की स्थापना के साथ गौरीशंकर की स्वर्ण की और नंदी की रजत की मूर्ति रखनी चाहिए। यदि धातु की मूर्ति संभव न हो तो शुद्ध मिट्टी से शिवलिंग बना लेना चाहिए।

कलश को जल से भरकर रोली, मौली, चावल, सुपारी, लौंग, इलायची, चंदन, दूध, दही, घी, शहद, कमलगट्टे, धतूरे, बिल्व पत्र आदि का प्रसाद शिवजी को अर्पित करके पूजा करनी चाहिए।

रात को जागरण करके ब्राह्मणों से शिव स्तुति अथवा रुद्राभिषेक कराना चाहिए। जागरण में शिवजी की चार आरती का विधान है। इस अवसर पर शिव पुराण का पाठ कल्याणकारी होता है। दूसरे दिन प्रातः जौ, तिल, खीर तथा बेल पत्रों से हवन करके ब्राह्मणों को भोजन करवाकर व्रत का पाठ करना चाहिए।

विधि-विधान तथा शुद्ध भाव से जो यह व्रत रखता है, भगवान शिव प्रसन्न होकर उसे अपार सुख-संपदा प्रदान करते हैं। भगवान शंकर पर चढ़ाया गया नैवेद्य खाना निषिद्ध है।

मान्यता है कि जो इस नैवेद्य को खा लेता है, वह नरक के दुःखों का भोग करता है। इसके निवारण के लिए शिव की मूर्ति के पास शालिग्राम रखना अनिवार्य है। यदि शिव की मूर्ति के पास शालिग्राम हो तो नैवेद्य खाने का कोई दोष नहीं होता।

पूजा करते समय यह मंत्र बोलें

मृत्युंजयमहादेव त्राहिमां शरणागतम्।

जन्ममृत्युजराव्याधिपीड़ितः कर्मबन्धनः।।

इस अवसर पर त्रिपत्र युक्त बिल्व पत्र भगवान् शिव को निम्र मन्त्र बोलते हुए चढ़ाएं…

ऊं त्रिदलं त्रिगुणाकारं, त्रिनेत्रं च त्रिधायुधम्।

त्रिजन्मपापसंहारं, बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥

 

 

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