फिल्म या डॉक्युमेंट्री में राष्ट्रगान बजे तो लोगों को खड़े होने की जरूरत नहीं: SC

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By TNM Editor February 14, 2017 12:38

फिल्म या डॉक्युमेंट्री में राष्ट्रगान बजे तो लोगों को खड़े होने की जरूरत नहीं: SC

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अगर किसी फिल्म या डॉक्युमेंट्री में राष्ट्रगान बजता है तो उस दौरान ऑडियंस को खड़े होने की जरूरत नहीं है। किसी को खड़े होने के लिए मजबूर भी नहीं किया जा सकता। हालांकि, लोगों को सिनेमा हॉल में फिल्म शुरू होने से पहले बजाए जाने वाले राष्ट्रगान पर खड़े होना पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर बहस होना जरूरी है। नवंबर में दिया था ऑर्डर…

– जस्टिस दीपक मिश्रा और आर. भानुमति की बेंच ने नेशनल एंथम पर नवंबर में दिए अपने इंटेरिम ऑर्डर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

– हालांकि बेच ने साफ किया, “जब राष्ट्रगान फिल्म की स्टोरीलाइन, न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री के तहत बजे तो उस पर खड़े होना जरूरी नहीं है।”

– बेंच ने कहा कि पिटिशनर्स इस मसले पर बहस चाहते हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल तय की गई है।

पिछला ऑर्डर रद्द करने की मांग

– बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 30 नवंबर में ऑर्डर दिया था कि सिनेमा हॉल में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाना होगा।

– इस दौरान स्क्रीन पर तिरंगा नजर आना चाहिए। साथ ही, राष्ट्रगान के सम्मान में सिनेमा हॉल में मौजूद सभी लोगों को खड़ा होना होगा।

– सुप्रीम कोर्ट में इस ऑर्डर को लेकर कई पिटीशन लगाई गई हैं, जिनमें इस ऑर्डर को वापस लेने की मांग की गई है।

– पिटिशनर्स का कहना है कि ये ऑर्डर अधिकारों का हनन करते हैं, कोर्ट को सिनेमा जैसे इंटरटेनमेंट जगहों पर ये लागू नहीं करना चाहिए।

– बता दें कि हाल ही में मुंबई में दंगल फिल्म के एक सीन में राष्ट्रगान बजने पर एक बुजुर्ग नहीं उठे तो उनकी सिनेमा हॉल में पिटाई कर दी गई थी।

नवंबर में दिए ऑर्डर में और क्या कहा था?

– जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली बेंच ने नवंबर में दिए अपने ऑर्डर में कहा था कि राष्ट्रगान बजाने के दौरान सिनेमा हॉल के गेट बंद कर दिए जाएं, ताकि कोई इसमें खलल न डाल पाए। राष्ट्रगान पूरा होने पर सिनेमा हॉल के गेट खोल दिए जाएं।

– राष्ट्रगान को ऐसी जगह छापा या लगाया नहीं जाना चाहिए, जिससे इसका अपमान हो।
– राष्ट्रगान से कमर्शियल बेनिफिट नहीं लेना चाहिए।
– राष्ट्रगान को आधा-अधूरा नहीं सुनाया या बजाया जाना चाहिए। इसे पूरा करना चाहिए।
– कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह ऑर्डर 10 दिन में लागू करने को कहा था। साथ ही, सभी स्टेट और यूनियन टेरेटरी से इस बारे में जानकारी देने को कहा था।

आधा-अधूरा न हो राष्ट्रगान

– सुप्रीम कोर्ट ने यह ऑर्डर भोपाल के श्याम नारायण चौकसे की पीआईएल पर सुनवाई करते हुए दिया।
– पिटीशन में सुप्रीम कोर्ट से यह ऑर्डर देने की मांग की गई थी कि देशभर के सिनेमा हॉलों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाया जाना चाहिए।
– कमर्शियल बेनिफिट के लिए राष्ट्रगान के इस्तेमाल पर रोक लगाई जानी चाहिए।
– एंटरटेनमेंट शो में ड्रामा क्रिएट करने के लिए राष्ट्रगान का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
– राष्ट्रगान एक बार शुरू होने पर आखिरी तक गाया जाना चाहिए। इसे बीच में नहीं राेकना चाहिए।

सरकार का ऑर्डर कुछ अलग था

– उधर भारत सरकार ने 5 जनवरी 2015 को ऑर्डर जारी किया था। इसके मुताबिक भी राष्ट्रगान के दौरान किसी को खड़े होने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

राष्ट्रगान के दौरान खड़े न होने पर हुई बदसलूकी

– पिछले साल मुंबई के एक सिनेमा हॉल से मुस्लिम परिवार को बाहर निकाल दिया गया था। उनके साथ बदसलूकी की गई थी।

– अक्टूबर में गोवा के एक सिनेमा हॉल में दिव्यांग लेखक सलिल चतुर्वेदी के साथ भी मारपीट की गई थी।

– इन लोगों पर सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान बजते वक्त बैठे रहने का आरोप था।

पहले भी सिनेमा घरों में बजाया जाता था राष्ट्रगान
– 1960 के दशक में भारत में सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान बजाने की शुरुआत हुई। ऐसा सैनिकों के सम्मान और लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाने के लिए होता था।
– हालांकि, बाद में शिकायतें हुईं कि सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान का अपमान होता है। इसके बाद करीब 40 साल पहले सरकार ने इसे बंद करवा दिया था।
– 2003 में महाराष्ट्र सरकार ने इसके लिए नियम बनाया, जिसके तहत सिनेमा हॉल में मूवी से पहले राष्ट्रगान बजाना और इस दौरान लोगों का खड़े रहना जरूरी किया गया।

 

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